बच्चों को जिम्मेदार कैसे बनाएं? उम्र के हिसाब से जिम्मेदारी सिखाने के आसान तरीके

बच्चों को जिम्मेदार कैसे बनाएं, यह सवाल लगभग हर माता-पिता के मन में कभी न कभी आता है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बड़ा होकर अपने काम खुद समझे, अपनी चीजों का ध्यान रखे और जरूरत पड़ने पर सही फैसला ले।

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अपने उम्र के साथ बड़ा होकर अपने काम खुद समझे, अपनी चीजों का ध्यान रखे और जरूरत पड़ने पर सही फैसला ले। लेकिन जिम्मेदारी की आदत एक दिन में नहीं बनती।

बच्चे को जिम्मेदार बनाने के लिए सिर्फ यह कहना काफी नहीं है कि “अपना काम खुद करो।” उसे धीरे-धीरे मौके देने पड़ते हैं, ताकि वह काम करना, गलती से सीखना और अपनी जिम्मेदारी समझना सीख सके।

बच्चों की सही परवरिश

कई घरों में हम देखते हैं कि माता-पिता बच्चे का हर काम खुद कर देते हैं। स्कूल बैग तैयार करना, सामान ढूंढना, कमरे की चीजें उठाना या पढ़ाई के लिए बार-बार याद दिलाना रोज की आदत बन जाती है।

शुरुआत में यह बच्चे की मदद लगती है, लेकिन लंबे समय में बच्चा अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भी माता-पिता पर निर्भर हो सकता है।

बच्चों को जिम्मेदार बनाना क्यों जरूरी है?

जिम्मेदारी का मतलब सिर्फ घर के काम करना नहीं है। इसका मतलब है कि बच्चा अपने काम, अपनी चीजों और अपने फैसलों के नतीजों को धीरे-धीरे समझना शुरू करे।

जब बच्चे को उसकी उम्र के हिसाब से जिम्मेदारी दी जाती है, तो उसमें खुद पर भरोसा बढ़ सकता है। उसे लगता है कि माता-पिता उस पर भरोसा करते हैं और वह कुछ काम खुद कर सकता है।

जिम्मेदारी बच्चे को रोजमर्रा की जिंदगी के लिए भी तैयार करती है। आगे चलकर उसे पढ़ाई, समय, पैसे, सामान और रिश्तों से जुड़े कई फैसले खुद लेने होंगे।

बच्चे को जिम्मेदार कैसे बनाएं?

बच्चे को जिम्मेदार बनाने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसे छोटे कामों से शुरुआत करने दें।

एक छोटे बच्चे से आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह घर की हर चीज खुद संभाल लेगा। लेकिन वह अपने खिलौने समेट सकता है, अपनी किताब सही जगह रख सकता है और अपना सामान पहचानना सीख सकता है।

धीरे-धीरे काम बढ़ाएं और बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार जिम्मेदारी दें।

1. बच्चे को छोटे काम खुद करने दें

बच्चों को जिम्मेदार कैसे बनाएं,बच्चा अपना स्कूल बैग खुद तैयार करते हुए

अगर बच्चा अपना स्कूल बैग खुद तैयार कर सकता है, तो हर दिन उसका बैग आपको तैयार करने की जरूरत नहीं है।

2. हर काम के लिए बच्चे को याद न दिलाएं

शुरुआत में उससे गलती हो सकती है। कोई किताब छूट सकती है या सामान गलत जगह रखा जा सकता है। ऐसे समय पर तुरंत पूरा काम अपने हाथ में लेने के बजाय उसे बताएं कि अगली बार क्या ध्यान रखना है।

बच्चे को जिम्मेदार बनाने में एक बड़ी गलती यह है कि माता-पिता हर काम बार-बार याद दिलाते रहते हैं।

“बैग रखो”,

“जूते रखो”,

“पानी की बोतल भरो”,

“होमवर्क करो”

जैसी बातें अगर हर दिन माता-पिता ही बोलते रहें, तो बच्चा खुद समय देखकर काम करने की आदत कम बना पाता है।

आप नियम और समय पहले से तय कर सकते हैं। इसके बाद बच्चे को काम याद रखने का मौका दें।

3. बच्चे को घर के छोटे कामों में शामिल करें

घर सिर्फ माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है। बच्चे को भी उम्र के हिसाब से छोटे कामों में शामिल किया जा सकता है।

बच्ची अपने खिलौने खुद व्यवस्थित करते हुए

उदाहरण के लिए बच्चा अपने खिलौने समेट सकता है, किताबें रख सकता है, पौधों में पानी दे सकता है या खाने के बाद अपनी प्लेट सही जगह रख सकता है।

इन कामों को सजा की तरह नहीं बल्कि रोज की सामान्य आदत की तरह रखें।

उम्र के हिसाब से बच्चों को कौन-सी जिम्मेदारी दें?

हर बच्चे की समझ और क्षमता अलग होती है। इसलिए उम्र सिर्फ एक सामान्य संकेत है। जिम्मेदारी देते समय बच्चे की क्षमता और सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

बच्चों की उम्र और विकास के हिसाब से उन्हें छोटे-छोटे काम देने के बारे में CDC की Positive Parenting Tips भी उपयोगी जानकारी देती है।

3 से 5 साल के बच्चों के लिए

इस उम्र में बहुत छोटे और आसान काम दिए जा सकते हैं।

• अपने खिलौने समेटना

• किताब सही जगह रखना

• गंदे कपड़े तय जगह पर रखना

• खाने के बाद अपनी चीजें जगह पर रखना

बच्चा पौधे में पानी देकर जिम्मेदारी सीखते हुए

• पौधों को पानी देने में मदद करना

इस उम्र में बच्चे को काम पूरा करने से ज्यादा काम की आदत सिखाना जरूरी है।

6 से 8 साल के बच्चों के लिए

अब बच्चा अपने रोज के कई काम थोड़ी मदद के साथ कर सकता है।

• स्कूल बैग व्यवस्थित करना

• जूते सही जगह रखना

• अपनी किताबें संभालना

• अपना बिस्तर ठीक करने में मदद करना

• कमरे की छोटी-मोटी चीजें व्यवस्थित करना

अगर बच्चा काम ठीक से नहीं करता, तो उसे तुरंत डांटने के बजाय दोबारा तरीका समझाएं।

9 से 12 साल के बच्चों के लिए

इस उम्र में जिम्मेदारी थोड़ी बढ़ाई जा सकती है।

• स्कूल की तैयारी खुद करना

• अपना कमरा व्यवस्थित रखना

• पढ़ाई का समय तय करने में हिस्सा लेना

• अपनी जरूरी चीजों का ध्यान रखना

• घर के कुछ आसान काम करना

अब बच्चे को यह समझाना भी जरूरी है कि हर काम के लिए किसी दूसरे व्यक्ति का इंतजार करना सही आदत नहीं है।

13 साल और उससे बड़े बच्चों के लिए

किशोर उम्र में बच्चे को छोटे फैसलों में शामिल करना काफी उपयोगी हो सकता है।

• अपने समय की योजना बनाना

• पढ़ाई की जिम्मेदारी लेना

• अपने सामान का ध्यान रखना

• सीमित पैसे का सही इस्तेमाल सीखना

• अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना

यहां माता-पिता की भूमिका हर काम करने वाले व्यक्ति की नहीं बल्कि सही दिशा दिखाने वाले व्यक्ति की होनी चाहिए।

बच्चे काम करने से जी चुराता है तो क्या करें?

कई बार बच्चा जिम्मेदारी से इसलिए नहीं भागता क्योंकि वह आलसी है। हो सकता है उसे काम मुश्किल लग रहा हो, उसे तरीका पता न हो या उसे हमेशा किसी के मदद करने की आदत पड़ गई हो।

पहले कारण समझें। फिर काम को छोटे हिस्सों में बांटकर बच्चे को शुरू करवाएं।

उदाहरण के लिए “अपना कमरा साफ करो” कहने के बजाय आप कह सकते हैं,

“पहले किताबें अपनी जगह रखो, फिर खिलौने समेटना।

”छोटा काम पूरा होने पर बच्चे को खुद अगला काम करने दें।

गलती होने पर बच्चे को तुरंत बचाएं नहीं

जिम्मेदारी सीखने का एक जरूरी हिस्सा है अपनी गलती का नतीजा समझना।

अगर बच्चा अपना सामान कहीं रखकर भूल गया है और सुरक्षित तरीके से उसे खुद ढूंढ सकता है, तो तुरंत उसके लिए सामान ढूंढने के बजाय उसे खोजने दें।

इसका मतलब बच्चे को परेशानी में छोड़ देना नहीं है। जरूरत पड़ने पर मदद करें, लेकिन हर छोटी समस्या का समाधान खुद करने की आदत न बनाएं।

जिम्मेदारी सिखाते समय डांट और तुलना से बचें

“देखो दूसरे बच्चे कितने जिम्मेदार हैं” जैसी बातें बच्चे को जिम्मेदार बनाने के बजाय उसका आत्मविश्वास कम कर सकती हैं।

इसी तरह हर छोटी गलती पर डांटने से बच्चा काम से बचना या गलती छिपाना सीख सकता है।

आप कह सकते हैं, “यह काम आज ठीक नहीं हुआ, चलो देखते हैं अगली बार इसे बेहतर कैसे कर सकते हैं।”बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि गलती सीखने का हिस्सा है।

बच्चे को जिम्मेदारी दें, लेकिन नियंत्रण अपने पास न रखें

कई माता-पिता बच्चे को जिम्मेदारी तो देते हैं, लेकिन काम करने का पूरा तरीका खुद तय करते हैं।

अगर बच्चा सुरक्षित तरीके से काम कर रहा है, तो उसे अपने तरीके से करने की थोड़ी आजादी दें।हो सकता है वह आपका तरीका न अपनाए, लेकिन अगर काम सही तरीके से हो रहा है तो हर चीज को अपने हिसाब से करवाना जरूरी नहीं है।

बच्चों को पढ़ाई की जिम्मेदारी कैसे सिखाएं?

पढ़ाई को लेकर माता-पिता का हर समय पीछे लगे रहना आम बात है। लेकिन बच्चे को धीरे-धीरे यह समझना चाहिए कि पढ़ाई सिर्फ माता-पिता की चिंता नहीं है। यह उसकी अपनी जिम्मेदारी भी है।

आप उसके साथ पढ़ाई का समय तय कर सकते हैं, जरूरी चीजों में मदद कर सकते हैं और समस्या आने पर बात कर सकते हैं।

लेकिन हर दिन किताब खोलने से लेकर होमवर्क खत्म करने तक हर कदम पर निगरानी रखना लंबे समय में सही आदत नहीं बनाता।

बच्चों को मोबाइल की जिम्मेदारी कैसे सिखाएं?

मोबाइल के मामले में सिर्फ “फोन मत चलाओ” कहना हमेशा काम नहीं करता।

बच्चे के साथ पहले से नियम तय करें कि मोबाइल कब इस्तेमाल होगा, कितना समय मिलेगा और पढ़ाई या सोने के समय उसका इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहिए।

धीरे-धीरे बच्चे को नियम समझने और अपनी आदत पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी दें।

आपके घर में अगर बच्चा मोबाइल के लिए बार-बार बहस करता है, तो केवल डांटने के बजाय यह समझना भी जरूरी है कि मोबाइल उसके लिए इतना जरूरी क्यों बन गया है।

जिम्मेदारी सिखाने में माता-पिता की 5 आम गलतियां

• बच्चे का हर काम खुद कर देना

• छोटी गलती पर तुरंत डांटना

• दूसरे बच्चों से तुलना करना

• बच्चे को उसकी उम्र से ज्यादा जिम्मेदारी देना

• जिम्मेदारी देने के बाद भी हर कदम पर नियंत्रण रखना

इन गलतियों से बचना उतना ही जरूरी है जितना बच्चे को काम सिखाना।

बच्चे को जिम्मेदार बनाने का आसान तरीका

आप घर में एक छोटा नियम बना सकते हैं।

हर बच्चे के लिए उसकी उम्र के अनुसार 2 से 4 रोज के काम तय करें। जैसे अपना सामान रखना, स्कूल बैग तैयार करना और खेलने के बाद खिलौने समेटना।

शुरुआत में आपको याद दिलाना पड़ सकता है। लेकिन धीरे-धीरे कोशिश करें कि बच्चा खुद समय देखकर काम करना शुरू करे।

काम पूरा होने पर हर बार इनाम देना भी जरूरी नहीं है। कई बार सिर्फ यह कहना कि “तुमने अपना काम खुद किया, यह अच्छी बात है” बच्चे के लिए काफी होता है।

याद रखें, जिम्मेदारी एक दिन में नहीं आती

बच्चा आज से जिम्मेदार बन जाएगा, ऐसी उम्मीद करना सही नहीं है। कभी वह काम करेगा, कभी भूल जाएगा और कभी जानबूझकर भी टाल सकता है। यही सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

आपका काम हर गलती पर गुस्सा करना नहीं, बल्कि सही आदत को बार-बार मजबूत करना है।

मैंने अपने आसपास अक्सर देखा है कि जिन बच्चों को छोटी उम्र से अपने छोटे काम खुद करने दिए जाते हैं, वे धीरे-धीरे रोजमर्रा की चीजों को लेकर ज्यादा सजग होने लगते हैं।

इसलिए शुरुआत बहुत छोटी रखें, लेकिन नियमित रखें।

निष्कर्ष

बच्चों को जिम्मेदार कैसे बनाएं, इसका सबसे अच्छा तरीका है कि उन्हें धीरे-धीरे अपने काम खुद करने का मौका दिया जाए।

बच्चों को जिम्मेदार बनाने का मतलब उनसे ज्यादा से ज्यादा काम करवाना नहीं है। असली बात यह है कि बच्चे को उसकी उम्र और क्षमता के हिसाब से अपने काम समझने, उन्हें पूरा करने और गलती से सीखने का मौका दिया जाए।

आज अगर आपका बच्चा अपना खिलौना खुद रखता है, कल अपना बैग खुद तैयार करता है और आगे चलकर अपने समय और फैसलों की जिम्मेदारी समझता है, तो यही धीरे-धीरे जिम्मेदारी की आदत बनती है।

माता-पिता का साथ जरूरी है, लेकिन हर काम बच्चे की जगह कर देना जरूरी नहीं है।

FAQs

1. बच्चों को जिम्मेदार कैसे बनाएं?

बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार छोटे-छोटे काम खुद करने दें। हर गलती पर डांटने के बजाय उसे गलती से सीखने का मौका दें।

2. बच्चे को घर के कौन से काम सिखाने चाहिए?

छोटे बच्चों को खिलौने और किताबें रखना जैसे आसान काम सिखाए जा सकते हैं। बड़े बच्चों को अपना बैग, कमरा, समय और निजी सामान संभालने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

3. किस उम्र से बच्चे को जिम्मेदारी देनी चाहिए?

जिम्मेदारी की शुरुआत बहुत छोटी उम्र से आसान कामों के साथ की जा सकती है। काम हमेशा बच्चे की उम्र, समझ और क्षमता के हिसाब से होना चाहिए।

4. बच्चा जिम्मेदारी वाला काम नहीं करता तो क्या करें?

पहले यह समझें कि वह काम क्यों नहीं करना चाहता। काम को छोटे हिस्सों में बांटें, तरीका समझाएं और हर बार उसका काम खुद करने के बजाय उसे कोशिश करने का मौका दें।

5. क्या बच्चे को जिम्मेदार बनाने के लिए डांटना जरूरी है?

नहीं। लगातार डांटने के बजाय साफ नियम, सही उदाहरण, नियमित अभ्यास और उम्र के हिसाब से जिम्मेदारी देना ज्यादा उपयोगी तरीका है।

आपके लिये

अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बच्चा धीरे-धीरे अपने काम खुद समझे और जिम्मेदारी लेना सीखे, तो आज से उसकी उम्र के हिसाब से एक छोटा काम उसे खुद करने दें। छोटी शुरुआत ही आगे चलकर बड़ी आदत बनाती है।

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