बच्चों में जिद और गुस्सा कई माता-पिता के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। छोटी-सी बात पर रोना, अपनी बात मनवाने के लिए जिद करना या गुस्से में चिल्लाना देखकर माता-पिता समझ नहीं पाते कि बच्चे को कैसे संभालें।
लेकिन हर बार बच्चे का गुस्सा सिर्फ उसकी जिद नहीं होता। उम्र, थकान, भूख, घर का माहौल, स्क्रीन टाइम, अपनी बात न समझा पाना और माता-पिता की प्रतिक्रिया जैसे कई कारण उसके व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए बच्चे को सिर्फ डांटने के बजाय यह समझना जरूरी है कि वह ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है।
बच्चों में जिद और गुस्सा कई माता-पिता के लिए परेशानी का कारण बन जाता है।

इस लेख में आपको क्या मिलेगा
✔️ बच्चों में जिद और गुस्से के सामान्य कारण
✔️ किन संकेतों पर माता-पिता को ध्यान देना चाहिए
✔️ बच्चे के गुस्से को शांत करने के आसान तरीके
✔️ माता-पिता की कौन-सी गलतियाँ समस्या बढ़ा सकती हैं
✔️ बच्चों को भावनाएँ समझना और बताना कैसे सिखाएं
✔️ कब विशेषज्ञ की मदद लेना सही रहेगा
बच्चों में जिद और गुस्सा क्यों बढ़ता है?
बच्चों में गुस्सा और जिद किसी एक कारण से नहीं बढ़ती। कई बार बच्चा अपनी जरूरत या परेशानी शब्दों में नहीं बता पाता और उसका असर उसके व्यवहार में दिखाई देता है।
आइए इसके कुछ सामान्य कारण समझते हैं।
1. बच्चा अपनी भावनाएँ ठीक से बता नहीं पाता
छोटे बच्चों के लिए यह बताना आसान नहीं होता कि उन्हें गुस्सा, दुख, डर या निराशा क्यों हो रही है।
ऐसे में वे रोकर, चिल्लाकर या जिद करके अपनी बात दिखा सकते हैं।
माता-पिता को पहले यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि बच्चे के व्यवहार के पीछे कौन-सी भावना हो सकती है।
2. हर मांग तुरंत पूरी होना
अगर बच्चे की हर मांग जिद करने पर पूरी हो जाती है, तो उसे यह सीख मिल सकती है कि जिद करने से उसकी बात मान ली जाएगी।
उदाहरण के लिए, बच्चा बाजार में खिलौने के लिए रोता है और माता-पिता उसे शांत करने के लिए खिलौना खरीद देते हैं।
ऐसा बार-बार होने पर जिद उसकी आदत का हिस्सा बन सकती है। इसलिए प्यार के साथ कुछ सीमाएँ तय करना भी जरूरी है।
3. मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल
मोबाइल या वीडियो बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर तब जब बच्चा लंबे समय तक स्क्रीन पर रहता हो या स्क्रीन बंद करने पर बार-बार गुस्सा करता हो।
लेकिन मोबाइल को बच्चों के गुस्से का अकेला कारण मानना सही नहीं है।
स्क्रीन टाइम के साथ बच्चे की नींद, दिनचर्या, खेल, परिवार के साथ समय और दूसरी गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
4. माता-पिता का समय कम मिलना
बच्चे को सिर्फ खाना, कपड़े और पढ़ाई की जरूरत नहीं होती। उसे माता-पिता का ध्यान और बातचीत भी चाहिए।
अगर बच्चा बार-बार अपनी बात बताना चाहता है और उसे सुनने वाला कोई नहीं मिलता, तो वह अपना ध्यान खींचने के लिए जिद या गुस्से का सहारा ले सकता है।
हर दिन कुछ समय सिर्फ बच्चे के साथ बातचीत करने के लिए निकालना उपयोगी हो सकता है।
5. घर का तनावपूर्ण माहौल
बच्चे घर के माहौल से बहुत कुछ सीखते हैं। अगर घर में बार-बार तेज आवाज में बहस, गुस्सा या तनाव रहता है, तो बच्चे पर भी इसका असर पड़ सकता है।
माता-पिता का शांत तरीके से बात करना बच्चे के लिए एक अच्छा उदाहरण बन सकता है।
6. बहुत ज्यादा सख्ती या बहुत ज्यादा छूट
हर बात पर डांटना और दूसरी तरफ हर मांग मान लेना—दोनों तरीके समस्या बढ़ा सकते हैं।
बच्चे को साफ और आसान नियम चाहिए।उसे यह पता होना चाहिए कि कौन-सी बात स्वीकार की जाएगी और कौन-सी नहीं।
अनुशासन का मतलब बच्चे को डराना नहीं, बल्कि सही व्यवहार समझाना है।
बच्चों में जिद और गुस्से के संकेत
हर बच्चा कभी न कभी गुस्सा या जिद कर सकता है। यह अपने आप में असामान्य बात नहीं है।
लेकिन अगर कुछ व्यवहार बार-बार और बहुत ज्यादा दिखाई दें, तो माता-पिता को ध्यान देना चाहिए।
जैसे:
• छोटी-छोटी बात पर बहुत ज्यादा गुस्सा करना
• बार-बार चिल्लाना या रोना
• अपनी बात न मानने पर चीजें फेंकना
• चीजों को तोड़ना
• घर के लोगों से लगातार बहस करना
• दूसरे बच्चों से बार-बार लड़ना
• सामान्य बातों पर बहुत ज्यादा नाराज होना
• गुस्से के कारण पढ़ाई या रोजमर्रा की गतिविधियाँ प्रभावित होना
अगर ऐसा व्यवहार लगातार बना रहता है, तो सिर्फ सजा देने के बजाय उसके कारण को समझना जरूरी है।
बच्चों की जिद और गुस्सा कम करने के आसान तरीके

अब सवाल है कि बच्चे की जिद और गुस्सा कम कैसे करें?
इसके लिए माता-पिता को एक साथ कई छोटे बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।
1. पहले खुद शांत रहें
जब बच्चा गुस्सा करे, तो माता-पिता भी तेज आवाज में जवाब देने लगें तो स्थिति और बिगड़ सकती है। पहले खुद शांत रहें।
फिर बच्चे से छोटे और साफ शब्दों में बात करें।उदाहरण:“मैं समझ रहा हूं कि तुम नाराज हो, लेकिन चिल्लाकर बात करने से समस्या हल नहीं होगी।”
2. बच्चे की बात ध्यान से सुनें
कई बार बच्चे को तुरंत सलाह नहीं चाहिए होती। वह चाहता है कि कोई उसकी बात सुने।
बच्चे को बीच में रोकने के बजाय पहले उसकी बात पूरी सुनें।
फिर पूछें:“तुम्हें किस बात पर गुस्सा आया?”इससे बच्चे को अपनी भावनाएँ शब्दों में बताना सीखने में मदद मिल सकती है।
3. हर मांग पूरी न करें
बच्चे को प्यार देना जरूरी है, लेकिन हर मांग पूरी करना जरूरी नहीं है।
अगर किसी चीज के लिए आपने “नहीं” कहा है, तो शांत तरीके से उसी फैसले पर कायम रहें।उसे कारण भी समझाएँ।
इससे बच्चे को धीरे-धीरे सीमाएँ समझने में मदद मिलती है।
4. अच्छे व्यवहार की तारीफ करें
जब बच्चा बिना जिद किए अपनी बात समझाता है या गुस्से में शांत रहने की कोशिश करता है, तो उसकी तारीफ करें।
जैसे:
“आज तुमने गुस्सा होने के बजाय अपनी बात बताई, यह अच्छी बात है।”इस तरह की तारीफ बच्चे को अच्छे व्यवहार को दोहराने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
5. बच्चे को रोज थोड़ा Quality Time दें
हर दिन 15–20 मिनट भी बच्चे के लिए खास समय हो सकता है।
इस दौरान:
• मोबाइल दूर रखें
• बच्चे की बात सुनें
• उसके साथ खेलें
• उसके दिन के बारे में पूछें
• बिना डांटे बातचीत करें
बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि माता-पिता उसके लिए समय निकालते हैं।
6. स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें
मोबाइल पूरी तरह बंद करना हर परिवार के लिए जरूरी या व्यावहारिक नहीं है। इसके बजाय उम्र और परिवार की दिनचर्या के अनुसार स्क्रीन के लिए स्पष्ट नियम बनाएं।
जैसे: • खाने के समय मोबाइल नहीं
• सोने से पहले स्क्रीन से दूरी
• पढ़ाई के समय मोबाइल अलग रखना
• स्क्रीन देखने के बाद दूसरे खेल या गतिविधि का समय रखना
सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता भी इन नियमों का पालन करें।
बच्चों की स्क्रीन टाइम, नींद और शारीरिक गतिविधि से जुड़ी WHO की गाइडलाइन यहां पढ़ सकते हैं।
7. बच्चे को अपनी भावनाओं के नाम बताना सिखाएं
जब बच्चा गुस्सा करे, तो सिर्फ “गुस्सा मत करो” कहने के बजाय उसकी भावना का नाम बताने में मदद करें।
जैसे:
“तुम्हें इसलिए गुस्सा आ रहा है क्योंकि तुम्हें अभी खेलने का मौका नहीं मिला।”
धीरे-धीरे बच्चा अपनी भावना को पहचानकर उसे शब्दों में बताना सीख सकता है।
8. बच्चे को शांत होने का समय दें
बहुत ज्यादा गुस्से के समय बच्चे को लगातार समझाना जरूरी नहीं होता।उसे कुछ देर शांत होने दें और पास रहें।
जब वह शांत हो जाए, तब बात करें। इस समय मारना, डराना या अपमानित करना सही तरीका नहीं है।
9. घर में नियमित दिनचर्या रखें
बच्चे की नींद, खाना, पढ़ाई और खेल का समय बहुत अनियमित हो तो वह चिड़चिड़ा हो सकता है।
इसलिए कोशिश करें कि रोज की दिनचर्या काफी हद तक एक जैसी रहे।
उसे पर्याप्त नींद, खेल और आराम का समय भी दें।
10. बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें
“देखो, दूसरा बच्चा कितना अच्छा है।”ऐसी बातें बच्चे को सुधारने के बजाय उसे दुखी या नाराज कर सकती हैं।
हर बच्चे की अपनी गति और अपनी खूबियाँ होती हैं।उसकी तुलना करने के बजाय उसके अपने पिछले व्यवहार से तुलना करें।
11. बच्चे को छोटे-छोटे काम खुद करने दें
जिम्मेदारी की आदत भी बच्चे के व्यवहार और आत्मविश्वास के विकास का हिस्सा है।
उम्र के अनुसार बच्चे को अपने खिलौने रखना, स्कूल बैग तैयार करना या अपनी चीजें संभालना जैसे छोटे काम खुद करने दें।
बच्चों को जिम्मेदार बनाने के आसान तरीकों के बारे में यहां पढ़ें।
12. गलती पर तुरंत सजा न दें
गलती होने पर पहले समझें कि गलती क्यों हुई। फिर बच्चे को बताएं कि अगली बार वह क्या अलग कर सकता है।
हर गलती पर डांटने के बजाय सही तरीका सिखाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
माता-पिता की कौन-सी गलतियाँ जिद बढ़ा सकती हैं?
कई बार बच्चे के व्यवहार को सुधारने की कोशिश में माता-पिता अनजाने में ऐसी बातें कर देते हैं जो समस्या को बढ़ा सकती हैं।
बार-बार चिल्लाना
बच्चे के गुस्से का जवाब गुस्से से देने पर वह शांत होने के बजाय और ज्यादा उत्तेजित हो सकता है।
हर बार धमकी देना
“अभी नहीं माने तो देख लेना।”ऐसी धमकियों की जगह साफ नियम और उनके शांत परिणाम बताना बेहतर है।
बच्चे की बात को छोटा समझना
बच्चे की परेशानी हमें छोटी लग सकती है, लेकिन उसके लिए वह उस समय बड़ी हो सकती है। पहले उसकी भावना समझें, फिर समाधान बताएं।
कभी बहुत सख्ती और कभी बहुत छूट
अगर एक दिन किसी काम की अनुमति है और अगले दिन उसी काम पर बहुत डांट पड़ती है, तो बच्चे के लिए नियम समझना मुश्किल हो सकता है।
घर के जरूरी नियम साफ और लगातार रखें।
गुस्से के समय तुरंत क्या करें?

जब बच्चा अचानक बहुत गुस्सा करे, तो इन बातों को आजमा सकते हैं:
1. खुद शांत रहें।
2. बच्चे को सुरक्षित जगह पर रहने दें।
3. तुरंत लंबी सीख न दें।
4. शांत आवाज में कम शब्दों में बात करें।
5. उसे थोड़ा समय शांत होने दें।
6. शांत होने के बाद पूछें कि उसे किस बात पर गुस्सा आया।
7. अगली बार ऐसी स्थिति में क्या करना है, यह समझाएँ।
अगर बच्चा खुद को या किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, तो उसकी सुरक्षा को सबसे पहले रखें।
बच्चों को गुस्सा संभालना कैसे सिखाएं?
बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि गुस्सा होना गलत नहीं है, लेकिन गुस्से में किसी को मारना, चीजें तोड़ना या चोट पहुंचाना सही नहीं है।
उसे कुछ आसान तरीके सिखाएं:
• गहरी और धीरे सांस लेना
• थोड़ी देर शांत जगह पर बैठना
• पानी पीना
• अपनी बात शब्दों में बताना
• किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना
• गुस्सा आने पर थोड़ी देर रुकना
इन तरीकों का अभ्यास बच्चा शांत समय में ज्यादा आसानी से सीख सकता है।
एक आसान उदाहरण
मान लीजिए बच्चा मोबाइल बंद करने के लिए कहने पर गुस्सा करता है।अगर माता-पिता हर बार मोबाइल वापस दे देते हैं, तो बच्चे को लग सकता है कि गुस्सा करने से नियम बदल जाता है।
इसके बजाय माता-पिता पहले से नियम तय कर सकते हैं:“वीडियो देखने का समय खत्म होने के बाद मोबाइल रख देंगे। अगर तुम्हें गुस्सा आ रहा है तो हम थोड़ी देर साथ बैठेंगे।”शुरुआत में बच्चा विरोध कर सकता है।
लेकिन माता-पिता अगर शांत रहकर एक ही नियम लगातार अपनाते हैं, तो बच्चे को धीरे-धीरे सीमा समझने में मदद मिल सकती है।
कब विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए?
हर जिद या गुस्से के लिए विशेषज्ञ की जरूरत नहीं होती।
लेकिन अगर बच्चे का व्यवहार लंबे समय तक बहुत ज्यादा बना रहे और उसके कारण घर, पढ़ाई, दोस्ती या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना सही हो सकता है।
खासकर तब ध्यान दें जब:
• बच्चा बार-बार हिंसक व्यवहार करता हो
• खुद को या किसी दूसरे को चोट पहुंचाने की कोशिश करता हो
• गुस्सा बहुत लंबे समय तक रहता हो
• स्कूल में व्यवहार की गंभीर समस्या हो
• बच्चा लगातार बहुत परेशान या उदास दिखाई देता हो
• सामान्य कोशिशों के बावजूद समस्या बनी रहे
• समय पर सही सलाह लेना बच्चे और परिवार दोनों के लिए मददगार हो सकता है।
बच्चों के गुस्से और जिद से निपटने के बारे में
बच्चों के गुस्से और जिद से निपटने के लिए माता-पिता को बच्चे की भावनाओं को समझने, साफ सीमाएँ बनाने और शांत तरीके से प्रतिक्रिया देने की जरूरत होती है।
बच्चों में जिद और गुस्सा कम करने के लिए बच्चे को समझना और लगातार सही तरीके अपनाना जरूरी है।
इस विषय पर UNICEF की Parenting Tips में भी बच्चों के गुस्से और भावनात्मक प्रतिक्रिया से निपटने के बारे में उपयोगी जानकारी दी गई है।
निष्कर्ष:
बच्चे को सिर्फ रोकें नहीं, समझें
बच्चों में जिद और गुस्सा देखकर तुरंत यह मान लेना सही नहीं है कि बच्चा बिगड़ गया है। कई बार उसके व्यवहार के पीछे कोई जरूरत, भावना, परेशानी या आसपास का असर हो सकता है।
माता-पिता अगर बच्चे की बात सुनें, साफ सीमाएँ रखें, स्क्रीन और दिनचर्या पर ध्यान दें और खुद शांत रहकर उदाहरण पेश करें, तो बच्चे को अपने व्यवहार और भावनाओं को संभालना सीखने में मदद मिल सकती है।
बदलाव एक दिन में नहीं आता। छोटी-छोटी अच्छी आदतों और लगातार सही तरीके से बच्चे को संभालने से धीरे-धीरे फर्क दिखाई दे सकता है।
FAQs
बच्चों में जिद और गुस्सा क्यों आता है?
बच्चों में जिद और गुस्से के कई कारण हो सकते हैं। उम्र, भावनाएँ, थकान, भूख, घर का माहौल, स्क्रीन टाइम और अपनी बात ठीक से न बता पाना इनमें शामिल हो सकते हैं।
बच्चों का गुस्सा कैसे कम करें?
बच्चे के गुस्से के समय खुद शांत रहें, उसकी बात सुनें, साफ सीमाएँ रखें और उसे अपनी भावनाएँ शब्दों में बताना सिखाएं।
क्या मोबाइल बच्चों के गुस्से का कारण है?
मोबाइल और ज्यादा स्क्रीन टाइम कुछ बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन इसे गुस्से का अकेला कारण नहीं माना जाना चाहिए।
क्या बच्चों को गुस्सा करने पर सजा देनी चाहिए?
मारना, डराना या अपमानित करना सही तरीका नहीं है। बच्चे को शांत करके यह समझाना बेहतर है कि गुस्सा होना ठीक है, लेकिन किसी को चोट पहुंचाना या चीजें तोड़ना सही नहीं है।
बच्चे की जिद कैसे कम करें?
हर मांग तुरंत पूरी न करें, घर के कुछ नियम पहले से तय करें और बच्चे के शांत तरीके से बात करने पर उसकी तारीफ करें।
कब बच्चे के गुस्से के लिए विशेषज्ञ से मिलना चाहिए?
अगर गुस्सा बहुत ज्यादा और लगातार बना रहे, हिंसक व्यवहार हो या उसकी वजह से पढ़ाई, घर या सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा हो, तो योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
आपसे एक सवाल
क्या आपके बच्चे को भी छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है या वह बार-बार जिद करता है?कमेंट में बताएं कि आपको सबसे ज्यादा परेशानी किस तरह के व्यवहार से होती है।
