क्या आप Passenger Parent हैं? 7 संकेतों से पहचानें कि आप बच्चे की परवरिश में पीछे तो नहीं रह गए

माता-पिता बच्चे के साथ परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए

बच्चे की परवरिश में सिर्फ घर पर मौजूद रहना ही काफी नहीं होता। बच्चे की पढ़ाई, उसकी परेशानियां, रोज की जरूरतें और छोटे-बड़े फैसले भी Parenting का हिस्सा हैं।

कई परिवारों में एक माता या पिता धीरे-धीरे इन ज्यादातर जिम्मेदारियों को संभालने लगते है। वहीं दूसरे माता या पिता बच्चे से प्यार तो करता है, लेकिन फैसलों और रोज के कामों में पीछे रह जाते है।

इसी तरह की स्थिति के लिए आजकल “Passenger Parent” शब्द इस्तेमाल हो रहा है। आसान भाषा में कहें तो अकेला माता या पिता Parenting की गाड़ी चला रहे होते है और दूसरा उसमें बैठा हुआ यात्री बनकर रह जाहै। लेकिन सवाल यह है कि आपको कैसे पता चले कि आप खुद Passenger Parent बन रहे हैं?

बच्चे की परवरिश दोनों माता-पिता की जिम्मेदारी है

बच्चे की परवरिश केवल मां या केवल पिता की जिम्मेदारी नहीं होती। दोनों माता-पिता की अपनी भूमिका होती है।

जरूरी नहीं कि दोनों हर काम बिल्कुल बराबर करें। परिवार की परिस्थितियों, काम और समय के हिसाब से जिम्मेदारियां अलग-अलग हो सकती हैं। लेकिन बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी लगातार केवल एक माता-पिता पर छोड़ देना सही नहीं है।

अगर एक माता-पिता बच्चे की पढ़ाई, दिनचर्या, जरूरी फैसलों, देखभाल और भावनात्मक जरूरतों से लगातार दूर रहता है और ज्यादातर जिम्मेदारी दूसरे माता-पिता को ही संभालनी पड़ती है, तो वह Passenger Parent की भूमिका में हो सकता है।

यानी सवाल यह नहीं है कि कौन कितना काम कर रहा है। सवाल यह है कि क्या दोनों माता-पिता बच्चे की परवरिश को अपनी जिम्मेदारी मान रहे हैं?

Parenting में मदद करना और Parenting की जिम्मेदारी लेना—दोनों एक जैसी बातें नहीं हैं।

Passenger Parent का मतलब क्या है?

Passenger Parent वह माता-पिता है जो बच्चे की जिंदगी में मौजूद तो रहते है, लेकिन Parenting की जिम्मेदारी और फैसलों में उतना सक्रिय नहीं रहते।

इसका मतलब यह जरूरी नहीं है, कि वह अपने बच्चे से प्यार नहीं करते या जानबूझकर जिम्मेदारी से भाग रहे होते है।

कई बार यह स्थिति धीरे-धीरे बनती है। एक माता या पिता बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताता है, इसलिए उसे उसकी आदतों और जरूरतों की ज्यादा जानकारी हो जाती है।

दूसरा माता या पिता काम या दूसरी जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के कारण पीछे रह जाता है।

कुछ समय बाद जो माता या पिता बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, बच्चे के विषय में वही फैसले लेने लगते है और दूसरा उन्हीं फैसलों पर निर्भर रहने लगता है।

Passenger Parenting पर हुई हाल की चर्चा में भी यही बात सामने आई है कि एक माता-पिता रोज के काम और फैसलों का बड़ा हिस्सा संभालता है, जबकि दूसरा धीरे-धीरे पीछे की भूमिका में चला जाता है।

क्या Passenger Parent होना हमेशा आपकी गलती है?

Passenger Parent की भूमिका में कम शामिल माता-पिता

नहीं।

यह बात समझना बहुत जरूरी है। Passenger Parenting कई बार जानबूझकर जिम्मेदारी छोड़ने से नहीं, बल्कि आदत और परिस्थितियों से बनती है।उदाहरण के लिए बच्चे के जन्म के बाद मां बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताती है। उसे बच्चे की नींद, खाना, दवा और दिनचर्या के बारे में ज्यादा जानकारी हो जाती है।

पिता काम पर वापस चला जाता है और कुछ समय बाद उसे खुद लगता है कि बच्चे के बारे में मां को ज्यादा पता है।

फिर वह छोटे-बड़े फैसलों के लिए मां पर निर्भर होने लगता है। यही आदत लंबे समय तक चलती रहे तो दोनों माता-पिता की भूमिका असंतुलित हो सकती है।

7 संकेत कि आप Passenger Parent बन रहे हैं

1. बच्चे से जुड़े फैसलों के लिए आप हमेशा दूसरे माता-पिता से पूछते हैं

बच्चे का स्कूल, होमवर्क, डॉक्टर, स्क्रीन टाइम, सोने का समय या किसी गतिविधि में जाना हो। अगर लगभग हर बार आपका पहला सवाल होता है, “मां से पूछ लो” या “पापा को पता होगा”, तो थोड़ा रुककर सोचने की जरूरत है।

हर चीज याद रखना जरूरी नहीं है। लेकिन बच्चे की जिंदगी से जुड़ी जरूरी बातों की जानकारी दोनों माता-पिता को होनी चाहिए।

2. बच्चे की रोज की दिनचर्या आपको ठीक से पता नहीं

बच्चा स्कूल से कितने बजे आता है?

उसका होमवर्क क्या है?

इन दिनों उसे किस चीज में परेशानी हो रही है?

वह किस दोस्त के साथ ज्यादा समय बिताता है?

अगर इन सवालों का जवाब आपको अक्सर दूसरे माता-पिता से पूछना पड़ता है, तो आप बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी से कुछ दूर हो सकते हैं।

यह दूरी एक दिन में नहीं बनती। अक्सर यह छोटी-छोटी चीजों से धीरे-धीरे बढ़ती है।

3. आप Parenting को “मदद” समझते हैं

“मैंने आज बच्चे को संभालने में पत्नी की मदद कर दी।”यह वाक्य हमारे घरों में बहुत सामान्य है। लेकिन अगर दोनों माता-पिता बच्चे की परवरिश कर रहे हैं, तो बच्चे की देखभाल किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है जिसमें दूसरा “मदद” करता है।

बच्चे को स्कूल छोड़ना, खाना खिलाना, होमवर्क देखना या डॉक्टर के पास ले जाना Parenting की जिम्मेदारी है।

जब आप इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हैं, तभी आपकी भूमिका मजबूत होती है।

4. आप सिर्फ आसान और मजेदार काम करते हैं

बच्चे को पार्क ले जाना, उसके साथ खेलना या खिलौना खरीदना अच्छी बातें हैं। लेकिन अगर बीमारी में देखभाल, स्कूल की मीटिंग, होमवर्क, डॉक्टर, अनुशासन और दूसरी मुश्किल जिम्मेदारियां हमेशा दूसरे माता-पिता संभालते हैं, तो जिम्मेदारी बराबर नहीं है।

बच्चे के साथ अच्छा समय बिताना जरूरी है। लेकिन बच्चे की मुश्किल घड़ी में उसके साथ खड़ा होना भी उतना ही जरूरी है।

5. आपको लगता है कि दूसरा माता-पिता आपसे ज्यादा अच्छा Parent है

यह सोच भी आपको पीछे कर सकती है।आपको लग सकता है कि “उसे बच्चे की हर बात पता है, मैं क्या ही कर पाऊंगा।”फिर आप कोशिश कम करने लगते हैं।

लेकिन किसी भी काम में बेहतर बनने के लिए उसे करना पड़ता है।अगर आप बच्चे की पढ़ाई, खाना, दिनचर्या या उसकी भावनाओं को समझने में नियमित रूप से शामिल होंगे, तो धीरे-धीरे आपकी समझ भी बढ़ेगी।

6. बच्चा परेशान हो तो वह हमेशा दूसरे माता-पिता के पास जाता है

यह अपने आप में कोई समस्या नहीं है।छोटे बच्चे किसी एक माता-पिता से ज्यादा जुड़े हो सकते हैं और यह उम्र के साथ बदल भी सकता है।

लेकिन अगर लंबे समय तक बच्चा हर परेशानी, डर या जरूरत के समय सिर्फ एक ही माता-पिता को खोजता है और दूसरा माता-पिता खुद भी उससे जुड़ने की कोशिश नहीं करता, तो इस रिश्ते पर ध्यान देने की जरूरत है।

बच्चे के साथ रिश्ता सिर्फ जरूरत पड़ने पर काम करने से नहीं बनता। रोज की छोटी बातचीत और साथ बिताया समय भी बहुत मायने रखता है।

7. आपको खुद लगता है कि आप बच्चे की परवरिश में पीछे रह गए हैं

यह सबसे महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। कभी-कभी व्यक्ति खुद महसूस करता है कि बच्चा उसके साथ रहता तो है, लेकिन उसकी रोज की जिंदगी में उसकी अपनी कोई मजबूत भूमिका नहीं है।

वह जानता है कि बच्चा किससे बात करता है, लेकिन यह नहीं जानता कि बच्चा इन दिनों किस बात को लेकर परेशान है।

वह बच्चे के साथ खेलता है, लेकिन उसके स्कूल और पढ़ाई की जानकारी दूसरे माता-पिता के पास रहती है।अगर आपको ऐसी स्थिति अपनी लग रही है, तो खुद को खराब Parent मानने की जरूरत नहीं है।

यह बदलाव की शुरुआत हो सकती है।

क्या कम समय देना Passenger Parenting है?

नहीं। यह फर्क बहुत जरूरी है। अगर कोई माता-पिता नौकरी के कारण लंबे समय तक घर से बाहर रहता है, लेकिन बच्चे की पढ़ाई, स्वास्थ्य, भावनाओं और जरूरी फैसलों में सक्रिय रहता है, तो सिर्फ कम समय के आधार पर उसे Passenger Parent कहना सही नहीं होगा।

दूसरी तरफ कोई व्यक्ति घर पर ज्यादा समय रहकर भी बच्चे की जिम्मेदारियों से दूर रह सकता है। इसलिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि माता-पिता बच्चे के साथ कितने घंटे रहते हैं। यह भी देखना जरूरी है कि वे बच्चे की जिंदगी में कितनी जिम्मेदारी और भागीदारी रखते हैं।

क्या Passenger Parenting सिर्फ पिता की समस्या है?

नहीं। हाल की रिसर्च और चर्चा में इस शब्द का इस्तेमाल खास तौर पर उन पिताओं की स्थिति समझाने के लिए हुआ है जो बच्चे की परवरिश में पीछे की भूमिका में चले जाते हैं।

लेकिन व्यवहार में ऐसी स्थिति किसी भी माता-पिता के साथ बन सकती है। किसी परिवार में पिता ज्यादा जिम्मेदारी संभाल सकता है और मां पीछे रह सकती है।इसलिए इसे सिर्फ “पिता की समस्या” या “मां की गलती” मानना सही नहीं होगा। असल मुद्दा यह है कि क्या दोनों माता-पिता बच्चे की परवरिश में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

एक माता-पिता पर सारा बोझ पड़ने से क्या होता है?

जब बच्चे की लगभग हर जरूरत एक ही व्यक्ति संभालता है, तो बाहर से सब ठीक दिखाई दे सकता है।लेकिन अंदर ही अंदर उस व्यक्ति पर लगातार मानसिक बोझ बढ़ सकता है।

बच्चे का स्कूल कब है, डॉक्टर को कब दिखाना है, कौन-सी चीज खत्म हो गई है, होमवर्क कब जमा होना है और बच्चा किस बात से परेशान है—ऐसे छोटे-छोटे फैसले मिलकर बड़ा बोझ बन जाते हैं।

यही वजह है कि Passenger Parenting सिर्फ बच्चे और माता-पिता का मुद्दा नहीं है। इसका असर पति-पत्नी के रिश्ते पर भी पड़ सकता है। जो व्यक्ति हमेशा जिम्मेदारी संभाल रहा है, उसे लग सकता है कि दूसरा व्यक्ति सिर्फ उसके कहने पर काम करता है। वहीं पीछे रहने वाला माता-पिता खुद भी यह महसूस कर सकता है कि उसे बच्चे की परवरिश में अपनी जगह नहीं मिल रही।

Passenger Parenting और लापरवाही में फर्क

दोनों को एक जैसा समझना ठीक नहीं है।लापरवाही में बच्चे की जरूरतों को लगातार नजरअंदाज करना शामिल हो सकता है।

Passenger Parenting में हर बार ऐसी नीयत नहीं होती। कई बार माता-पिता बच्चे की परवरिश में शामिल होना चाहता है, लेकिन उसे लगता है कि दूसरा माता-पिता सब कुछ ज्यादा अच्छी तरह जानता है।

धीरे-धीरे वह फैसले लेना और जिम्मेदारी उठाना कम कर देता है। इसे जानबूझकर काम से बचने वाली आदत से भी अलग समझना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर “मुझे कुछ नहीं आता” का दिखावा करके हर जिम्मेदारी दूसरे पर डालता है, तो वह अलग समस्या है।

इसलिए हर कम शामिल माता-पिता को तुरंत लापरवाह कहना सही नहीं है।

अगर आप Passenger Parent हैं तो क्या करें?

सबसे पहले खुद को दोष देना बंद करें।अगर आपको लगता है कि आप बच्चे की परवरिश में पीछे रह गए हैं, तो छोटी जिम्मेदारी से शुरुआत करें।

एक काम पूरी तरह अपने जिम्मे लें

सिर्फ यह मत कहिए कि “मैं भी मदद करूंगा।”कोई एक जिम्मेदारी पूरी तरह अपने हाथ में लें। जैसे बच्चे का होमवर्क, स्कूल की तैयारी, रात में कहानी पढ़ना या सप्ताह में कुछ दिन स्कूल से जुड़ा काम।

काम को शुरुआत से अंत तक खुद संभालें। इससे आपको बच्चे की जरूरतों को समझने का मौका मिलेगा।

बच्चे के साथ रोज थोड़ा समय बिताएं

माता-पिता बच्चे के साथ परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए

इसके लिए घंटों निकालना जरूरी नहीं है। रोज 20 या 30 मिनट भी काफी अच्छी शुरुआत हो सकती है। उससे पूछें कि आज स्कूल में क्या हुआ। उसकी पसंद की चीज पर बात करें।

उसके साथ खेलें या बस कुछ देर बैठकर उसकी बात सुनें। हर बातचीत का कोई मकसद होना जरूरी नहीं है।

बच्चे की जानकारी खुद रखें

दूसरे माता-पिता से हर छोटी बात पूछने की आदत धीरे-धीरे कम करें। बच्चे के स्कूल, पढ़ाई, डॉक्टर, पसंद, डर और रोज की दिनचर्या के बारे में खुद जानकारी रखें।इसका मतलब यह नहीं कि आपको सब कुछ अकेले संभालना है। मतलब सिर्फ इतना है कि आप भी जिम्मेदार Parent हैं।

अपने साथी से खुलकर बात करें

यह बातचीत शिकायत से शुरू न करें।यह मत कहिए कि “तुम मुझे बच्चे से दूर रखती हो” या “तुम मुझे कुछ करने नहीं देते।”

इसके बजाय पूछें:

• बच्चे की कौन-सी जिम्मेदारी मैं अपने हाथ में ले सकता हूं?

• आपको सबसे ज्यादा किस काम का बोझ महसूस होता है?

• बच्चे से जुड़ी कौन-सी बात मुझे खुद सीखनी चाहिए?

• अगले सप्ताह हम जिम्मेदारियां कैसे बांट सकते हैं?

बातचीत का मकसद किसी को दोष देना नहीं, बल्कि Parenting को साथ चलाना होना चाहिए।

7 दिन का Parenting Self-Check

अगर आप सच में जानना चाहते हैं कि आपकी भूमिका कितनी सक्रिय है, तो सात दिन तक बच्चे से जुड़े काम लिखें।

हर दिन देखें:

• बच्चे की पढ़ाई किसने देखी?

• खाना और दिनचर्या किसने संभाली?

• बच्चे के साथ किसने बात की?

• उसकी परेशानी किसने सुनी?

• स्कूल से जुड़ा काम किसने किया?

• बच्चे के लिए फैसला किसने लिया?

• बच्चे के साथ बिना किसी काम के समय किसने बिताया?

सात दिन बाद पूरी सूची देखें। अगर ज्यादातर जिम्मेदारियां बार-बार एक ही व्यक्ति के हिस्से में आ रही हैं, तो यही वह जगह है जहां बदलाव शुरू किया जा सकता है।

यह किसी को दोष देने का टेस्ट नहीं है। इसका मकसद सिर्फ परिवार में जिम्मेदारियों की असली तस्वीर देखना है।

क्या Parenting में 50-50 जरूरी है?

नहीं। हर परिवार में काम और समय की स्थिति अलग होती है। हो सकता है एक माता-पिता नौकरी के कारण ज्यादा समय बाहर रहे और दूसरा घर पर ज्यादा जिम्मेदारी संभाले।

बराबरी का मतलब हर काम बिल्कुल आधा-आधा करना नहीं है। जरूरी यह है कि एक व्यक्ति हमेशा Planning, Decision और Responsibility संभालता रहे और दूसरा सिर्फ बताए गए काम करता रहे—ऐसी स्थिति लंबे समय तक न बने।

साझा Parenting का मतलब है कि दोनों अपनी क्षमता और समय के हिसाब से बच्चे की जिंदगी में जिम्मेदारी लें।

बच्चे को असल में क्या चाहिए?

बच्चे को Perfect Parent की जरूरत नहीं होती।उसे ऐसे माता-पिता चाहिए जो उसकी बात सुनें, उसकी जरूरत समझें और जरूरत पड़ने पर उसके साथ खड़े रहें।

कभी माता-पिता से गलती होगी। कभी किसी दिन समय नहीं मिलेगा। कभी एक माता-पिता ज्यादा काम संभालेगा। यह सब सामान्य है। समस्या तब बनती है जब पीछे रहना एक स्थायी आदत बन जाए और बच्चे की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति पर टिकी रहे।

निष्कर्ष

Passenger Parent होना कोई ऐसा ठप्पा नहीं है जिसे देखकर किसी माता-पिता को खराब कह दिया जाए।

कई बार यह स्थिति बिना किसी की योजना के धीरे-धीरे बनती है। एक माता-पिता ज्यादा काम संभालता है, दूसरा उस पर निर्भर होने लगता है और कुछ समय बाद दोनों को यही व्यवस्था सामान्य लगने लगती है।

अगर ऊपर दिए गए सात संकेतों में आपको अपनी स्थिति दिखाई देती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।आज से बच्चे की एक जिम्मेदारी खुद उठाइए। उसके साथ थोड़ा समय बिताइए।

उसकी बात सुनिए। और अपने साथी से बिना आरोप लगाए बात कीजिए। Parenting में सबसे जरूरी बात यह नहीं है कि कौन ज्यादा काम कर रहा है। जरूरी यह है कि बच्चा यह महसूस करे कि उसके माता-पिता दोनों उसकी जिंदगी में सच में मौजूद हैं।

आपके घर में क्या हो रहा है?

अगर आपको लगता है कि बच्चे की परवरिश का ज्यादा बोझ एक ही माता-पिता उठा रहा है, तो आज ही ऊपर दिए गए 7 संकेतों को अपने घर की स्थिति से मिलाकर देखें। अगर यह लेख आपको उपयोगी लगा, तो इसे अपने जीवनसाथी या किसी ऐसे माता-पिता के साथ शेयर करें, जिसे इसकी जरूरत हो सकती है।

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FAQs

1. Passenger Parent किसे कहते हैं?

Passenger Parent उस माता-पिता को कहा जाता है जो बच्चे की जिंदगी में मौजूद तो रहता है, लेकिन रोज की Parenting जिम्मेदारियों और फैसलों में सक्रिय भागीदारी कम हो जाती है।

2. क्या Passenger Parenting सिर्फ पिता करते हैं?

नहीं। हाल की चर्चा में पिताओं के उदाहरण ज्यादा सामने आए हैं, लेकिन यह स्थिति किसी भी माता-पिता के साथ बन सकती है।

3. क्या कम समय देना Passenger Parenting है?

नहीं। कम समय देना और Parenting से पीछे रहना अलग बातें हैं। यह देखना जरूरी है कि माता-पिता बच्चे की जिम्मेदारियों और फैसलों में कितना शामिल हैं।

4. Passenger Parent बनने से कैसे बचें?

बच्चे की कुछ जिम्मेदारियां खुद संभालें, उसकी दिनचर्या और जरूरतों को समझें, उसके साथ नियमित समय बिताएं और अपने साथी के साथ Parenting की जिम्मेदारियों पर खुलकर बात करें।

5. क्या Passenger Parenting और लापरवाही एक ही है?

नहीं। Passenger Parenting कई बार बिना जानबूझकर जिम्मेदारी छोड़ने के भी बन सकती है। लापरवाही में बच्चे की जरूरतों को लगातार नजरअंदाज करना शामिल हो सकता है।

6. क्या Parenting की जिम्मेदारी 50-50 होनी चाहिए?

जरूरी नहीं। हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं। जरूरी यह है कि बच्चे की Planning, Decision और जिम्मेदारी लंबे समय तक सिर्फ एक ही माता-पिता पर न टिकी रहे।

आपके लिए

अगर आपको इस लेख में खुद की या अपने पार्टनर की कुछ बातें पहचान में आई हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। Passenger Parent होना कोई स्थायी पहचान नहीं है।

छोटी-छोटी जिम्मेदारियां खुद संभालने और बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी में सक्रिय रहने से शुरुआत की जा सकती है।

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा, तो इसे अपने पार्टनर या किसी ऐसे माता-पिता के साथ जरूर शेयर करें, जिन्हें इसकी जरूरत हो सकती है।

• Passenger Parenting पर प्रकाशित शोध

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